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गुरु नानक देव जी के भजन पीडीऍफ़ पुस्तक | Shri Guru Nanak Dev Ji Ke Bhajan PDF Book In Hindi

गुरु नानक देव जी के भजन पीडीऍफ़ पुस्तक | Shri Guru Nanak Dev Ji Ke Bhajan PDF Book In Hindi 


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Guru Nanak Dev Ji Ke Bhajan - 
याभ सझमभय, याभ सझमभय, एही तेयो काज है॥
भामाकौ सॊग त्माग, हरयजूकी सयन राग।
जगत सझख भान मभथ्मा, झूठौ सफ साज है॥१॥
सझऩने ज्मों धन पऩछान, काहे ऩय कयत भान।
फारृकी बीत तैसें, फसझधाकौ याज है॥२॥
नानक जन कहत फात, बफनमस जैहै तेयो गात।
छछन छछन करय गमौ काल्ह तैसे जात आज है॥३॥
2.
हरय बफनझ तेयो को न सहाई।
काकी भात-पऩता सझत फछनता, को काहू को बाई॥
धनझ धयनी अरू सॊऩछत सगयी जो भाछनओ अऩनाई।
तन छू टै कझ
छ सॊग न चारै, कहा ताहह रऩटाई॥
दीन दमार सदा दझ:ख-बॊजन, ता मसउ रूचच न फढाई।
नानक कहत जगत सब मभचिआ, ज्मों सझऩना यैनाई॥
3.
जो नय दझख भें दझख नहहॊ भानै।
सझख सनेह अरू बम नहहॊ जाके , कॊ चन भाटी जानै।।
नहहॊ छनॊदा नहहॊ अस्तझछत जाके , रोब-भोह अमबभाना।
हयष शोक तें यहै छनमायो, नाहहॊ भान-अऩभाना।।
आसा भनसा सकर त्माचग के , जग तें यहै छनयासा।
काभ, क्रोध जेहह ऩयसे नाहीॊ, तेहह घट ब्रह्भ छनवासा।।
गझरू ककयऩा जेहह नय ऩै कीनहीॊ, छतनह मह जझगझछत पऩछानी।
नानक रीन बमो गोबफॊद सों, ज्मों ऩानी सों ऩानी।।



  • Name Of E-Book : Guru Nanak Dev Ji Ke Bhajan

  • Language Of E-Book : Hindi

  • Size Of E-Book : 113 KB

  • Total Pages in E-Book : 4



jkl 


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